हर बार आवाज ने ओढ़ ली खामोशी की चादर
महत्वकांक्षा भी देता रहा संतोष को ही सत्कार।
https://ae-pal.com/
कुछ इस तरह जिंदगी में आता रहा ठहराव का अतिभार
आखिर,
ठहराव ने फिर चुना आवाज को ही हथियार।
अपर्णा शर्मा
March24th,2026
हर बार आवाज ने ओढ़ ली खामोशी की चादर
महत्वकांक्षा भी देता रहा संतोष को ही सत्कार।
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आखिर,
ठहराव ने फिर चुना आवाज को ही हथियार।
अपर्णा शर्मा
March24th,2026
kubsurat line
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Thankyou
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