मैं जोड़ता रहा,अपना वजूद उसके वज़ूद से
वो तोड़ता रहा,मेरे वज़ूद को मेरे वज़ूद से।
https://ae-pal.com/
जब हो गया मैं,अपने वज़ूद से बिल्कुल खाली
अब ढूँढ रहा हूँ अपना वज़ूद उसके वज़ूद में।
अपर्णा शर्मा
Oct.13th,2026
सब्र
सब्र इतना ही देना ऐ खुदा, जो इज्ज़त पर आँच न आए।
https://ae-pal.com/
साबीर* को ये दुनिया अक्सर कमजोर समझ लेती है।
धैर्यवान*
अपर्णा शर्मा
Oct.6th,2026
डर
बीते हुए खूबसूरत पलों को जीना चाहता है
साथ ही अप्रिय पलों को बदलना चाहता है।
https://ae-pal.com/
वर्तमान की बेहतरीन कल्पनाओं में विचरता मनुष्य
अपने भविष्य से फिर भी थोड़ा डर जाता है।
अपर्णा शर्मा
Sept.29th,2026
