दिल की दास्तान



दिल के किसी कोने में महफ़ूज़ उसकी बातें,यादें मुलाकातें.
वो बिना ओर छोर की लगातार बातें, यादगार मुलाकातें.

अपने ही रंग तरंग में डूब लहराती, मचलती सी गुफ़्तगू.
मेरे हर सवाल को लाजवाब सा जवाब देती गुफ़्तगू.

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नजरो का नज़र से मिलने पर नजर चुरा कर देखती नज़रे.
पास आते ही रास्ता बदल दूर तक पीछा करती नज़रे.

सूखे फूल,तीन पत्ती, काग़ज़ के पीले पन्ने है जिंदगी की यादें.
खजाना खूब है पाया मोहब्बत में खो कर मिली है दर्द सी यादें.
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शरारतों से भरे दिन,एक चुप्पी को समझ बैठते थे
मुलाकातें.
पास से गुज़रे,जमघट में कभी उठते-बैठते, यही थी मुलाकातें.

सात पर्दों में छिपी, महफूज रखी है मैंने दास्तान.
मुमकिन नहीं पर यहीं है मोहब्बत से रीते दिल की दास्तान.

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