शीतल रातों में चाँद सी चमक ले कर
छा गई हर जगह चाँदनी सी बिखर कर
यहाँ, वहाँ सब ओर वो सितारों सी दिख रही
चाँदनी के तार से यादों के गलीचे काढ़ कर।
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उसको सामने देख रजनीगंधा महक रही
सभी श्वेत पुष्पों पर उसकी मौजूदगी दिख रही
हरसिंगार का सिंगार प्रकृति को सजा रहा
उसके स्वागत को धरा आसमाँ को निहार रही।
आई वो और आलिंगन से तृप्त कर दिया
हर पत्ते,फूल पर अपना स्पर्श अंकित कर दिया
फैलाया प्रकृति ने भी खोल कर जब बाहों को
रात का वचन दे उसने फिर निराश कर दिया।
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उसकी इस अदा पर प्रकृति ने मन को मसोसा
सभी श्वेत पुष्पों ने अपने को फिर से था समेटा
हरसिंगार उदास हो,जमीं पर था बिखरा
ये शबनम की बूँदे जैसे प्रेमियों के मन की आह।
अपर्णा शर्मा
July 10th,2026
भूमिका
जीवन निर्माण को
माँ के हिस्से
सदा रही
नदियां
रेशम
ममता
और
मखमली एहसास
संग
गले में झूला
झूलता नादां
ता-उम्र बचपन.
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पिता ने चुन
लिया
पर्वत
प्रस्तर
खद्दर
और
दायित्व
संग
हर लक्ष्य को
तैयार
जिम्मेदार व्यक्तित्व.
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कभी-कभी
होता है इसका
प्रतिकूल भी.
अपर्णा शर्मा
July 3rd, 2026
प्रेम ऐसा भी
वो सफर पर अकेला था
वो वहीं पर अकेली खड़ी
बस यह वज़ह रही जीने की
वो थी प्रेम की सुनहरी लड़ी.
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वक़्त के बीतते-बीतते
दोनों बढ़ चले अपने रास्ते
पर आज भी वज़ह है वहीं
दोनों के प्रेम की सुनहरी लड़ी.
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न मिलने की अभिलाषा
न विरह का कराहना
मौन जीवन में वज़ह वहीं
दोनों के प्रेम की सुनहरी लड़ी.
अपर्णा शर्मा
June 26th,2026
