सावन में मन

अंतर्मन में मेघा बरस रहे
अंगना अब भी सूखा है
बादल खूब छाए घनेरे
आँगन आस में डूबा है।

अंधियारी संग छाए बदरा
जरुर बरस कर जाएगें
मौन खड़े वृक्ष,उपवन भी
जैसे तन-मन भी तर जाएंगे।

जाने कितने बरस है बीते
बिन बहनों के घर सूना है
बिटिया भी बहना ही होगी
मन बारिश सा बरसा है।
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कितने सावन चले गए
वो सावन कब आएगा
जब झूमेंगें मस्त मगन हो
मेघा प्यार बरसाएगा।
अपर्णा शर्मा
August 14th,2026

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