कच्चे सूत से बना
लाल और पीला रंगा
बांध कर वृक्षों पर
बना मन्नतों का धागा.
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आस्था में भिगा
ईश्वर को चढ़ाया
और कहलाया
विश्वास का धागा.
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बहन ने वहीं धागा
कलाई पर जब बाँधा
भाई ने माना,धागा है
प्यारा सा बंधन.
अपर्णा शर्मा
Aug.28th,2026
सावन में मन
अंतर्मन में मेघा बरस रहे
अंगना अब भी सूखा है
बादल खूब छाए घनेरे
आँगन आस में डूबा है।
अंधियारी संग छाए बदरा
जरुर बरस कर जाएगें
मौन खड़े वृक्ष,उपवन भी
जैसे तन-मन भी तर जाएंगे।
जाने कितने बरस है बीते
बिन बहनों के घर सूना है
बिटिया भी बहना ही होगी
मन बारिश सा बरसा है।
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कितने सावन चले गए
वो सावन कब आएगा
जब झूमेंगें मस्त मगन हो
मेघा प्यार बरसाएगा।
अपर्णा शर्मा
August 14th,2026
अधूरा कैनवास
जिंदगी के कैनवास पर
अनगिनत रंग बिखरते रहे
वक़्त के साथ-साथ कभी
निखरते रहे कभी बिखरते रहे।
जिंदगी में हर शख्स कुछ
सीखा कर चला गया
इसीबीच दोस्तों का भी दौर
गुबार बन कर उड़ गया।
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प्यार के वो अनमोल पल
सुनहरा रंग भर गए
जिंदगी के कैनवास पर
सुकून का रंग दे गए।
कभी थी स्याह सी जिंदगी
उड़ेली तब उम्मीद की रोशनाई
ऐसे ही रंगों के संग खेलते
हमने पूरी जिंदगी थी बिताई।
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अकेलापन का ये धूसर रंग
मानो जिदंगी करे बदरंगी
भिगोकर यादों की बारिश में
लगे यही सावन की बदली।
जिंदगी के अंत में आज भी
कैनवास अधूरा सा दिखा
अनगिनत रंग होते हुए भी
विश्वास का रंग न दिखा।
अपर्णा शर्मा
August 7th,2026
