अधूरा कैनवास

जिंदगी के कैनवास पर
अनगिनत रंग बिखरते रहे
वक़्त के साथ-साथ कभी
निखरते रहे कभी बिखरते रहे।

जिंदगी में हर शख्स कुछ
सीखा कर चला गया
इसीबीच दोस्तों का भी दौर
गुबार बन कर उड़ गया।
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प्यार के वो अनमोल पल
सुनहरा रंग भर गए
जिंदगी के कैनवास पर
सुकून का रंग दे गए।

कभी थी स्याह सी जिंदगी
उड़ेली तब उम्मीद की रोशनाई
ऐसे ही रंगों के संग खेलते
हमने पूरी जिंदगी थी बिताई।
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अकेलापन का ये धूसर रंग
मानो जिदंगी करे बदरंगी
भिगोकर यादों की बारिश में
लगे यही सावन की बदली।

जिंदगी के अंत में आज भी
कैनवास अधूरा सा दिखा
अनगिनत रंग होते हुए भी
विश्वास का रंग न दिखा।
अपर्णा शर्मा
August 7th,2026

शबनम की बूँदें

शीतल रातों में चाँद सी चमक ले कर
छा गई हर जगह चाँदनी सी बिखर कर
यहाँ, वहाँ सब ओर वो सितारों सी दिख रही
चाँदनी के तार से यादों के गलीचे काढ़ कर।
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उसको सामने देख रजनीगंधा महक रही
सभी श्वेत पुष्पों पर उसकी मौजूदगी दिख रही
हरसिंगार का सिंगार प्रकृति को सजा रहा
उसके स्वागत को धरा आसमाँ को निहार रही।

आई वो और आलिंगन से तृप्त कर दिया
हर पत्ते,फूल पर अपना स्पर्श अंकित कर दिया
फैलाया प्रकृति ने भी  खोल कर जब बाहों को
रात का वचन दे उसने फिर निराश कर दिया।
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उसकी इस अदा पर प्रकृति ने मन को मसोसा
सभी श्वेत पुष्पों ने अपने को फिर से था समेटा
हरसिंगार उदास हो,जमीं पर था बिखरा
ये शबनम की बूँदे जैसे प्रेमियों के मन की आह।
अपर्णा शर्मा
July 10th,2026

भूमिका

जीवन निर्माण को

माँ के हिस्से
सदा रही
नदियां
रेशम
ममता
और
मखमली एहसास
संग
गले में झूला
झूलता नादां
ता-उम्र बचपन.
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पिता ने चुन
लिया
पर्वत
प्रस्तर
खद्दर
और
दायित्व
संग
हर लक्ष्य को
तैयार
जिम्मेदार व्यक्तित्व.
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कभी-कभी
होता है इसका
प्रतिकूल भी.
अपर्णा शर्मा
July 3rd, 2026

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