वो ढूंढता रहा इश्क
हो कर दर ब दर
मिलता रहा प्रेम
स्वार्थ में लिपट कर।
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कभी जरुरत तक
कभी छले जाने तक
और कभी इश्क उतरा
जान कर असलियत।
कभी सरलता के आवरण में
कभी सरसता के लावण्य में
ठगता रहा हर कदम इश्क
मासूम दिलों को बहला कर।
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काश किसी को ग़र इश्क मिले
इत्तला जरुर हो उस मासूम को
जो आज भी बदहवास सा हुआ
दर ब दर ढूंढ रहा इश्क को।
अपर्णा शर्मा
June19th,2026
ठहराव भी वाजिब है
सफर है यह जिंदगी,जहाँ है हज़ारों उलझने
जब भी मौका मिले सफर में ठहराव भी वाजिब है।
अगर कोई हद से ज्यादा दिखाए अपनापन
तो सफर में कुछ हादसा होना लाज़िम है।
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जरूरी नहीं इस सफर में सामान पर डाका पड़े
एहसासों का खजाना लुटना भी शामिल है।
नरम दिल ऐसे ही हर पड़ाव में न लुटते रहे
ठहर कर सोचो,क्या दुनिया एहसासों के काबिल है ?
अपर्णा शर्मा
June 12th,2026
अवसाद के दिनों में
निकल पड़ो तुम अपनी धुन में
मंजिल खुद ही दिख जाएगी
छोड़ो डरना मन ही मन में
कि ये राह किधर को जाएगी।
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याद करो वो बचपन के दिन
हर कदम बढ़ते बढ़ते था डुगलाया
फिर भी चलते-चलते कब सोचा
कि ये राह किधर को जाएगी।
जब जब दौर चला मुश्किल का
तब तब नया रस्ता था आजमाया
ऐ दिल क्यूँ है तू डूबा डूबा सा
कि ये राह किधर को जाएगी।
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वक़्त कभी न ठहरा है
ये वक़्त भी गुजर जाएगा
क्यूँ सोच सोच कर हैरां है
कि ये राह किधर को जाएगी।
अपर्णा शर्मा
June 5th, 2026
