बादलों के घिरने से,बारिश हो,जरुरी तो नहीं
मैं जो चाहूँ ,वहीं बात हो,जरुरी तो नहीं.
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वो सच हो जाए,जो मैंने कभी सोचा ही नहीं
इश्क में कोई मुलाकात हो,जरुरी तो नहीं.
अपर्णा शर्मा
Sept.1st,2026
दो पंक्ति
मन मसोसकर वो,हर वक़्त जीता रहा
मन को हर कदम पर,मारता ही रहा।
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साल-दर-साल चढ़ता रहा,उम्र के पड़ाव
इंतजार में थी जिंदगी, देखती जीने की राह।
अपर्णा शर्मा
Aug. 25th,2026
स्मृतियाँ
जिनसे अब बातें नहीं,मुलाकातें नहीं
इसका मतलब ये तो बिल्कुल नहीं
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कि वो भूला हुआ अतीत बन गए
यादें बनकर,बसे हैं हममें यहीं कहीं।
अपर्णा शर्मा
August 11th,2026
