वज़ूद

मैं जोड़ता रहा,अपना वजूद उसके वज़ूद से
वो तोड़ता रहा,मेरे वज़ूद को मेरे वज़ूद से।
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जब हो गया मैं,अपने वज़ूद से बिल्कुल खाली
अब ढूँढ रहा हूँ अपना वज़ूद उसके वज़ूद में।
अपर्णा शर्मा
Oct.13th,2026

सब्र

सब्र इतना ही देना ऐ खुदा, जो इज्ज़त पर आँच न आए।
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साबीर* को ये दुनिया अक्सर कमजोर समझ लेती है।
धैर्यवान*
अपर्णा शर्मा
Oct.6th,2026

झूठ के किले

वो झूठ बोल कर ,झूठ के किले बनाते रहे
अपने हिसाब से सभी के,किरदार गढ़ते रहे
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जब सामना कराया किरदारों ने,असलियत से
तब सभी किरदारों में,नुक़स ढूंढते फिर रहे।
अपर्णा शर्मा
Sept.22nd,2026

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