दो पंक्ति

अंगारों पर बैठी दुनिया,एक दूजे को कमतर आंक रही।
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क्रूर होती दुनिया,अब मानवता को धिक्कार रही।
अपर्णा शर्मा
March 3rd,2026

2 thoughts on “दो पंक्ति

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  1. अपर्णा शर्मा जी,
    आपकी पंक्तियाँ समय की सच्चाई को तीखे और निर्भीक शब्दों में उजागर करती हैं। “अंगारों पर बैठी दुनिया…” यह चित्र आज के वातावरण की बेचैनी और असहिष्णुता को गहराई से दर्शाता है। मानवता के क्षीण होते स्वर और प्रतिस्पर्धा की कठोरता पर आपका यह चिंतन बहुत सार्थक और जागरूक करने वाला है।
    ईश्वर करे कि इस होली पर हम सब अपने भीतर के द्वेष और अहंकार को होलिका-दहन में समर्पित करें, और प्रेम, करुणा तथा सौहार्द के रंगों से जीवन को सजा सकें।

    आपको और आपके परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    रंगों का यह पर्व आपके जीवन में शांति, संवेदना और उजास के नए रंग भर दे।
    सादर 🙏

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    1. प्रोत्साहन हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीय साथ ही, रंगोत्सव होली की हार्दिक शुभकामनाएं.

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