ठहराव भी वाजिब है

सफर है यह जिंदगी,जहाँ है हज़ारों उलझने
जब भी मौका मिले सफर में ठहराव भी वाजिब है।

अगर कोई हद से ज्यादा दिखाए अपनापन
तो सफर में कुछ हादसा होना लाज़िम है।
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जरूरी नहीं इस सफर में सामान पर डाका पड़े
एहसासों का खजाना लुटना भी शामिल है।

नरम दिल ऐसे ही हर पड़ाव में न लुटते रहे
ठहर कर सोचो,क्या दुनिया एहसासों के काबिल है ?
अपर्णा शर्मा
June 12th,2026

2 thoughts on “ठहराव भी वाजिब है

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