दो पंक्ति

इंतजार की घड़ी से जार जार होकर
आँखे थक गई सब से बेजार होकर ।
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खुद_ब-खुद जब ख्वाबों से हुई गुफ़्तगू 
पलकें झुक गई ख्वाब को सच समझ कर।
अपर्णा शर्मा
June 10th,2026

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