दो पंक्ति

श्रेष्ठ दिखने की चाह में सरलता खोती रही
सरलता के साथ ही,सत्यता भी धुँधलाती रही।
https://ae-pal.com/
इस प्रचलन पर सवाल सा उठता है बहुधा
श्रेष्ठता के बोझ तले मनुष्यता ही अब खो रही।  अपर्णाशर्मा March 31st

Leave a comment

Blog at WordPress.com.

Up ↑