अब इसकी सजा क्या दोगे?

सुनो! प्रकृति

बिसरती नदियां
बिखरती प्रलय।
फैलती सड़के
सिमटते अरण्य।
बढ़ते पर्यटक
घटता हिमालय।
अब इसकी सजा क्या दोगे?

सुनो! समाज

सिकुड़ते घर
बढ़ते खर्च।
घटते विद्यालय
बढ़ते कुतर्क।
घटते उत्सव
बढ़ते अपकर्ष।
अब इसकी सजा क्या दोगे?
अपर्णा शर्मा
Jan.16th,26

2 thoughts on “अब इसकी सजा क्या दोगे?

Add yours

Leave a reply to Aparna Sharma Cancel reply

Blog at WordPress.com.

Up ↑