विचारों की दुनिया

विचारों का आना जाना जीवन का प्रवाह बतलाता है
कभी स्नेह भाव से, कभी घृणा से परिचय कराता है।

माना विचारों की सात्विकता संजोए रखना सबकी बात नहीं
पर सद्विचार से पूर्ण गुणीजन का सानिध्य पाना कठिन भी नहीं।

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विचारों की सकारात्मकता व्यक्तित्व निखारती है
जिधर से निकलो मीठी सुगंध बिखेर जाती है।

जब ऐसे ही मनसागर में भावों की लहरें उठती है
शब्दों का आकार ले,तब अपनी विचारों की दुनिया बसती है।

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