इश्क

वो ढूंढता रहा इश्क
हो कर दर ब दर
मिलता रहा प्रेम
स्वार्थ में लिपट कर।
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कभी जरुरत तक
कभी छले जाने तक
और कभी इश्क उतरा
जान कर असलियत।

कभी सरलता के आवरण में
कभी सरसता के लावण्य में
ठगता रहा हर कदम इश्क
मासूम दिलों को बहला कर।
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काश किसी को ग़र इश्क मिले
इत्तला जरुर हो उस मासूम को
जो आज भी बदहवास सा हुआ
दर ब दर ढूंढ रहा इश्क को।
अपर्णा शर्मा
June19th,2026

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