तपिश

सोना तप कर कुंदन बने
लोहा बने औजार
यूँही हिमखंड तप कर बने
निर्मल जल की धार।

जब प्रेम पर विरह ताप के
बरसे तेज अंगार
प्रेम रूप बदल कर हुआ
जीवन का आधार।
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राधा कृष्ण सी भक्ति जगे
मिले जीवन को आकार
प्रेम के ताप में तपकर उठे
पूर्ण समर्पण भाव।

तपिश, अथाह प्रेम की
ना जाने लोकाचार
रोम-रोम,साँस में बसे
जिन अंखियों में है प्यार।
अपर्णा शर्मा
Jan.3rd,25

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