चुगली

चुगली ना करते गर दुनिया में
तो ख़बरों को दीमक लग जाती.
सब लाड-प्यार से रहते,आपस में
जिंदगी जैसे, निरस हो जाती।

मुश्किल होता,समय काटना
काया रोगी जैसी हो जाती.
बिन चुगली के, सोचो जरा
दुनिया रंग भरी ही रह जाती।

चुगली संक्रामक बीमारी सी
एक से दूजे को झट लग जाती.
सुन्दर,संवरी दुनिया को,सहसा ही
कितना बदरंग कर जाती।

सुर में सुर मिलाकर, निंदा करना
अद्भुत समां बाँधता हैं
समय भूलकर, इस निंदा राग में
अद्भुत ही आनंद आता है।

हास परिहास भरी चुगली
परिवेश को हल्का है करती
अफवाहों में लिपटी चुगली
दिलों में फासला है करती।
अपर्णा शर्मा
Dec.13th,24

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