ये ख़ामोशियां

अंदेशे का शिकार होती हैं  ख़ामोशियां
एक तरफा शिकायत होती है ख़ामोशियां
कहते हैं आते तूफ़ाँ की पहचान होती है ये
बड़े ज़ख्मों के लिए तैयार करती हैं ख़ामोशियां।
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इन्द्रधनुषी पुष्पों के उपवन सी प्रसन्नता से पहले
अनंत दुख के महा सागर में डुबोने के तुरंत पीछे
अक्सर ही अनचाही सी सर्वत्र पसर जाती है
न जाने कितना बोलती है ये ख़ामोशियां।
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हर कोने में घूम-घूमकर है बूड़बुड़ाती
शांत परिवेश में बेइंतिहा ही बतियाती
जीवन की बदलती हर करवट का अंदाजा देकर
बिन कहे सब कह जाती है ये ख़ामोशियां।
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महफ़िल का साथ ख़ामोशियां नहीं करती है पसंद
एकांत ही लगे श्रेष्ठ,जैसे से पुष्प में छिपा मकरंद
मन ही मन बात बना कर ये वाचाल खामोशी
मंज़िल की राह दिखा देती हैं ये  ख़ामोशियां।
अपर्णा शर्मा
July 5th,24

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