दिखावा

रिश्तों से भरे इस मेले में
प्रियजनों के मंजुल रेले में
हर एक जान से प्यारा लागे
क्यूँ भूले,सब दिखावे का खेला रे?
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जीवन की टेढी-मेढ़ी राहों में
दुःख सुख की पगडंडियों में
जिन्हें प्रेम का हमराही माना था
वो सुख का ठिकाना बने रहे।

ऐसा कोई पैमाना भी नहीं
जो प्रेम को तौले सही सही
समय ही मात्र उपाय इसका
और कोई मूल्यांकन नहीं।
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राग अनुराग जो तन में भर जाए
श्रद्धा से मन भी झुक झुक जाए
वहां दिखावे का कोई स्थान नहीं
प्रेमी केवल ईश्वर सा हो जाए.।
अपर्णा शर्मा
Dec.22nd,23

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