दुःख और दर्द

दुःख आया,तो ज़माने ने कुछ यूं बाँट लिया
कि दर्द के साए, मेरे साथ जिए जा रहे हैं।

खूबियों को ज़माने पर,इस खूबी से लुटा दिया
पर दर्द को, बस कागज पर उकेरे जा रहे हैं।
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उदासियों को, दिन की खुशियों में छुपा दिया
और दर्द को रातों का सामान करते जा रहे हैं।

शोक में कभी डूबना और तैरना सीख लिया
ऐसे दर्द -ए-एहसास को, समंदर करते जा रहे हैं।
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ज़माने ने दर्द में जीना गज़ब का सिखा दिया
अब दर्द को ही जिंदगी समझते जा रहे हैं।

कोई मलाल के बगीचों को सींचता रह गया
वो दर्द को सीढ़ी बना जिंदगी जिए जा रहे हैं।
अपर्णा शर्मा
Dec.8th,23

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