अकेलापन


व्यस्तता के दिनों में अकेलापन स्वप्न सा दिखे
और इस प्रिय स्वप्न में अकेलापन झूला सा झूले।

व्यस्त ज़िंदगी में फुर्सत के पल सुकून से पले
अकेले होने के लाभ नज़र में रहते हैं हर पल बसे।

लाचारीवश अकेलापन जीवन में जब आए
अंधेरों में कराहाए और उजालों में भी डराए।
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ऊपर से शांत झील सा,अंदर समंदर सा मचलता
अकेलापन वज़ूद को शनैः शनैः खोखला ही करता।


स्वयं का अपनाया अकेलापन जन्म देता नए सृजन का
आत्म ज्ञान और आत्म बोध से नव व्यक्तिव को खोजता।
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वहीं थोपा हुआ अकेलापन आ जाए गर जीवन में
अति शक्तिशाली व्यक्तित्व भी घिर जाए अवसाद में।

एकांत हेतु अकेलापन है मानो सर्वश्रेष्ठ उपहार
मजबूरीवश अकेलापन से होता रोगों का आगाज।
अपर्णा शर्मा April 28th, 23

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