जब शहर में मेला आता

शहर और गांव में मेल कराता
जीवन में रोमांच भर जाता
गांववासी अपनी हाट सजाते
शहरी अपनी खोज पे इतराते
जब शहर में मेला आता।

शहर शहर खूब पंडाल सजे है
जन सारे माँ का स्वागत करे है
ऋतु परिवर्तन का संदेश है देता
कन्या को देवीरूप में पूजा जाता
जब शहर में मेला आता।
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गरबा की तैयारी खूब है होती
ऐसे दिन छोटे,रातें लंबी होती
नई ऊर्जा को संचारित करता
गरबा पूरे देश में धूम मचाता.
जब शहर में मेला आता।

राम लीला का मंचन होता
प्रतिवर्ष सत्य जीत ही जाता
नई आशा कहीं आश्वासन देती
असत्य की कभी जमीन न होती
जब शहर में मेला आता।
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झूले, दुकानें और खेल खिलौने
सातवें आसमाँ की उमंग दे जाते
कोई मेले को,जी भर जीता
कोई अपनी यादों में है खोता
जब शहर में मेला आता।
अपर्णा शर्मा
Nov.3rd,23

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