संवाद

मन ही मन होता जब संवाद
हर प्रश्न के उत्तर होते लाजवाब।
जो मन को खुशी से झूमा दे बात
संतुष्ट हो मन,न उठे फिर विवाद।

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अंतर्मन की हर दुविधा का प्रतिकार होता
स्व संवाद में मन सब को पटखनी दे देता।
संवाद के हर गुण में, मन दक्षता रखता
शिकायतों का पुलिंदा पूर्ण समक्ष रखता।

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असल में ,जब संवाद के क्षण से टकराए
मिसरी सी आवाज पर धराशायी हो जाए।
त्याग कर सब विवाद,मतभेद भूल जाए
बात करने से,मन धवल सा चमक जाए।

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