बचपन के खेल निराले
कभी पानी में नाव तैरातें
बेमतलब की दौड़ लगा कर
रेत के फिर घर बनाते।
https://ae-pal.com/
अपने घर के अभियंता बनकर
वास्तुकार सा सुन्दर घर सजाकर
चेहरे पर खिलती मोहक मुस्कान
अब घर बिल्कुल बनकर हुआ तैयार।
बचपन देखे, जहाँ रेत का टीला
पानी डालकर करता उसको ढीला
न कोई नींव,न उसको कोई ज्ञान
और भरभरा कर गिरती गृहशाला।
https://ae-pal.com/
तब बचपन को लगता पहला धक्का
दुनिया क्षणभंगुर,कुछ न पक्का
भाई, बहन और घर का संग भी
सब कच्चा,बस सबमें प्रेम ही सच्चा।
अपर्णा शर्मा
August,1st,2025
नादानी
जिनका हाथ थामे बैठे थे, जिंदगी के अंधेरों में
https://ae-pal.com/
वो पंछी बन उड़ चले, जिंदगी के उजालों में.
अपर्णा शर्मा
July 29th,25
मनभावन ऋतु
आह कैसी मनभावन ऋतु है आई
सावन के बरसने की ऋतु हैआई।
लगती कभी गर्म, कभी सुहानी
ऐसी हवा चली, मद-सी मतवाली।
पुरवा के संग में खूब इठलाती
कभी बिन हवा, स्वेद बढ़ाती।
आह कैसी मनभावन ऋतु है आई
सावन के बरसने की ऋतु हैआई।
https://ae-pal.com/
दमकती है धूप, कभी होती छांव
समझ न आते, कभी इसके दांव।
फूलाती सबके, हरदम हाथ पांव
लुका छुपी में बीतते ऐसे दिन रात।
आह कैसी मनभावन ऋतु है आई
सावन के बरसने की ऋतु हैआई।
घेवर, गुझियों से सजे बाजार
चूड़ी,मेहंदी से हरा भरा श्रृंगार।
झूला झूले और गाए गीत मल्हार
बेटी सखियों का मिलन त्योहार।
आह कैसी मनभावन ऋतु है आई
सावन के बरसने की ऋतु हैआई।
https://ae-pal.com/
शिव की स्तुति, गौरा का ताप
प्रेम,आस्था का अटूट विश्वास।
विरह कहे या कहे मधु_मास
बम बम भोले गूंजे हर श्वास।
आह कैसी मनभावन ऋतु है आई
सावन के बरसने की ऋतु हैआई।
अपर्णा शर्मा
July 25th,25
