अतीत

लौटा नहीं नासमझी का वो निराला वक़्त
समझ आते ही,जो रूठ गया बचपन
और ना ही पलट कर सामने आया
ख्यालों से भरा चपल लड़कपन।
https://ae-pal.com/
लौटे नहीं ,जो कभी थे बेवक्त बिछड़े 
स्मृतियाँ से भरी अब वे सिंदूरी शामें
घर के,हर कोने, दालान में समाकर
बसे है निशाँ उन्हीं के अहसासात के।

लौटे नहीं वो शानदार सुनहले दिन
काश की आस में गुजरे स्वप्निल छिन।
जिए थे कभी जो नम दिल के एहसास
सीले पड़े है अफ़सानों के वो पलछिन।
https://ae-pal.com/
लौटता कुछ भी नहीं इस संसार में
जैसे नहीं लौटते समय,नदी और प्यार
कल्पना सागर में तैरता वो खूबसूरत ख़्याल 
चाहे हो,अचानक जेहन में,कौंधता विचार।
अपर्णा शर्मा
Sept.11th,2026

नाम

हर जगह पर उसी के निशाँ दिखे
दर और दीवार पर उसी के छाप दिखे।
https://ae-pal.com/
हम आज भी अजनबी से वहाँ थे खड़े
नाम पट्टिका पर लिखे नाम के असर दिखे।
अपर्णा शर्मा
Sept.8th,2026

कविता जो रह गई अधूरी

जब कभी कवि मन लिखता सामाजिक मुद्दों को
भावनाएं उद्वेलित हो हलचल करती चितवन को
बिटिया का प्रभुत्व लिखना चाहे जब भी  कलम
पक्षपाती का इल्ज़ाम झेल, छुपाता रहता कवि अपने को.
https://ae-pal.com/
जब भी कवि ने बेरोजगारी लिखनी चाही
महंगाई ने गर्दन टेढ़ी कर उस को दिखलाई
शिक्षा और चिकित्सा की बदहाली पर जब लिखा
राजनीतिक कविता के तमगे की तब ही जिल्लत पाई.

कविता में जब लिखा प्रकृति के सौंदर्य को
अलौकिक उपमाओं से नवाज़ा तब रचना को
गर लिखा प्राकृतिक शोषण का विस्तार कभी
विकास का शत्रु तब-तब माना गया कवि को.
https://ae-pal.com/
अधिकांशतः कवियों की भांति मनोहर विषयों पर लिखकर
नित, नए प्रपंचों और विवादों से यूँ चुपके से बचकर,
छोड़ दी प्रश्न और चिंताओं की अनेकों रचनाएं अधूरी
गर्व से सम्मान पा गए वो एक सच्चे कवि बनकर.
अपर्णा शर्मा  Sept. 4th,2026

Blog at WordPress.com.

Up ↑