पीर

मन की पीर कभी न कहिये,रखो दिल में छिपाए
होती बड़ी जग हँसाई,गर किसी को भनक लग जाए।

दर्द को बांटने वाले भी,होते हैं बातों के छलिये
कब ठग लेंगे जान न पाओगे,दुख को सुनते सुनते।
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सोच समझकर किसी को,अपनी पीर सुनाना
सारी दुनिया में गूंजेगा,फिर तेरी कमियों का तराना।

दुनिया को बस,सबके दुख पर ही हँसना आता
देख किसी की खुशियों को,भूल जाते वो मुस्काना।
अपर्णा शर्मा
Sept. 25th,2026

झूठ के किले

वो झूठ बोल कर ,झूठ के किले बनाते रहे
अपने हिसाब से सभी के,किरदार गढ़ते रहे
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जब सामना कराया किरदारों ने,असलियत से
तब सभी किरदारों में,नुक़स ढूंढते फिर रहे।
अपर्णा शर्मा
Sept.22nd,2026

मनमर्जी


दिन ढलते ही
जब बैठता हूँ
पच्छिम की खिड़की
को खोल कर।
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कहते हैं सभी
और
जानते भी है
कि सूर्यास्त देखना
मेरा पसंदीदा शग़ल है।
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वो नहीं जानते
मैं आज भी खिड़की
के दूसरी तरफ सिर्फ
तुम्हे ही देखता हूँ
धीरे-धीरे दूर जाते।
अपर्णा शर्मा Sept.18th,2026

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