वो झूठ बोल कर ,झूठ के किले बनाते रहे
अपने हिसाब से सभी के,किरदार गढ़ते रहे
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जब सामना कराया किरदारों ने,असलियत से
तब सभी किरदारों में,नुक़स ढूंढते फिर रहे।
अपर्णा शर्मा
Sept.22nd,2026
नाम
हर जगह पर उसी के निशाँ दिखे
दर और दीवार पर उसी के छाप दिखे।
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हम आज भी अजनबी से वहाँ थे खड़े
नाम पट्टिका पर लिखे नाम के असर दिखे।
अपर्णा शर्मा
Sept.8th,2026
जरुरी तो नहीं
बादलों के घिरने से,बारिश हो,जरुरी तो नहीं
मैं जो चाहूँ ,वहीं बात हो,जरुरी तो नहीं.
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वो सच हो जाए,जो मैंने कभी सोचा ही नहीं
इश्क में कोई मुलाकात हो,जरुरी तो नहीं.
अपर्णा शर्मा
Sept.1st,2026
