दो पंक्ति

मन मसोसकर वो,हर वक़्त जीता रहा
मन को हर कदम पर,मारता ही रहा।
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साल-दर-साल चढ़ता रहा,उम्र के पड़ाव
इंतजार में थी जिंदगी, देखती जीने की राह।
अपर्णा शर्मा
Aug. 25th,2026

स्मृतियाँ

जिनसे अब बातें नहीं,मुलाकातें नहीं
इसका मतलब ये तो बिल्कुल नहीं
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कि वो भूला हुआ अतीत बन गए
यादें बनकर,बसे हैं हममें यहीं कहीं।
अपर्णा शर्मा
August 11th,2026

आज और कल

इतिहास गवाह है कि,
बीते कल का खामियाजा सदा ही आज ने सहन किया।
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ऐ आज! सुनो, तुम ऐसा करो कि आने वाले कल को नाज़ हो।
अपर्णा शर्मा
July 28th,2026

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