चाँद की सीख

चाँद तेरा प्रतिरात को नए रूप-रंग में आना.
मंद-मंद चाँदनी से जीवन का पाठ बताना.

सुख में इतना खुश न हो जाना.
तारों काअस्तित्व समझ न पाना.
अमा की रात भी तारों सजी ये कहना.
मंद-मंद चाँदनी से जीवन का पाठ बताना.

दुख में टूटकर कभी बिखर न जाना.
दूज का चांद सा तेरा अस्तित्व में आना.
धीरे-धीरे फिर से पूनम का चांद हो जाना.
मंद-मंद चाँदनी से जीवन का पाठ बताना.

https://ae-pal.com/

सुख के बाद दुःख और फिर से सुख की रैना.
चार दिन चंदा की चाँदनी फिर से अंधेरी रैना.
समय के चक्र को सरलता से कह जाना.
मंद-मंद चाँदनी से जीवन का पाठ बताना.

ए चाँद! साकामी बनाता है तेरा यूँ बढ़ना.
अहंकार से बचाता है तेरा ही तो घटना.
जीवन के नाप-तौल को बखूबी सीखाना.
मंद-मंद चाँदनी से जीवन का पाठ बताना.

कुदरत

ज़िंदगी के सफ़र में यक से, अजनबी टकराते हैं

धीरे-धीरे दिल के क़रीब आ, अज़ीज़ बन जाते हैं।

बातों-मुलाक़ातों से शुरू, सारी दुनिया हो जाते है

हर ख़ुशी-ग़म में, उसे यूँही सब राबता कराते हैं।

https://ae-pal.com

अज़ीज़ इतना कि उसके सिवा वजूद मंज़ूर नहीं

उसे भी दुनिया में कोई और शख़्स क़बूल नहीं।

अचानक वक़्त अपना कड़वा खेल, खेल जाता है

मामला कुछ नहीं और वो बीच रास्ता छोड़ जाता है।

इंसान है, सो खोना-पाना, मिलना-बिछड़ना क़बूल करता है

दर्द दिल में लिए, इसे ही क़ुदरत का उसूल मान लेता है।

उम्र

उम्र क्यों बिला वज़ह मजबूर कर रही

ज़िंदगी सदा से जीने की वज़ह दे रही।

उम्र जब देखो पाबंदी की बात करती है

ज़िंदगी वहीं पुरजोश जीना सिखाती है।

https://ae-pal.com

यूँ न समझ, ए उम्र! के रुकावटें न थी रास्ते में

फिक्र को, तमाम कर गई ज़िंदगी अपनी हस्ती में।

जब अपना अक्स देखती है उम्र आईने में

उम्र शरमा जाती है, ज़िंदगी के मुस्कराने पे।

Blog at WordPress.com.

Up ↑