विचारों की दुनिया

विचारों का आना जाना जीवन का प्रवाह बतलाता है
कभी स्नेह भाव से, कभी घृणा से परिचय कराता है।

माना विचारों की सात्विकता संजोए रखना सबकी बात नहीं
पर सद्विचार से पूर्ण गुणीजन का सानिध्य पाना कठिन भी नहीं।

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विचारों की सकारात्मकता व्यक्तित्व निखारती है
जिधर से निकलो मीठी सुगंध बिखेर जाती है।

जब ऐसे ही मनसागर में भावों की लहरें उठती है
शब्दों का आकार ले,तब अपनी विचारों की दुनिया बसती है।

आसमाँ

सतत प्रार्थना यहीं कि सभी के सम्मुख हो अपना आसमाँ.
खिले,पले,बढ़े,स्वप्नों से गढ़ा सभी का रंगीन हो आसमाँ.

बचपन का मासूम कौतुहल से भरा छोटा सा आसमाँ.
खेल, खिलौने, माँ का अंक और दुलार, पिता सा प्यारा आसमाँ.

युवाओं के भविष्य के इर्द-गिर्द, उड़ानों से सजा नीला आसमाँ.
हौंसला देता, मार्ग प्रदर्शक सा,बन्द मुट्ठी में मचलता आसमाँ.

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उम्र की साँझ में शांति, संतुष्टि के चाँद तारों से सजा आसमाँ.
हर सुख से भरा आँगन आशिर्वचन सा आसमाँ.

जिनका जीवन सब सुख से रहा सूना,तपता सा आसमाँ.
उन्हें भी जमीन देकर, संरक्षण देता चादर सा आसमाँ.

गुलाब और मैं

सवेरे ही उससे मेरी मुलाकात हो गई.
देखते ही उस को मुस्कान खिल गई.

वोभी झूमकर हवा में खिलके मुस्कराया.
खूबसूरती से अपना हाल कह सुनाया.

मैं भी स्पर्श कर,उसे हौले से मुस्कराई.
दोनों के जीवन में अनेकों समानता पाई.

दुनिया की नज़र में हम दोनों काँटों से घिरे हैं.
नहीं जानते वो,यहीं हमारे सुरक्षा के दायरे हैं.


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अपनों के काँटे कहाँ,कभी अपने ही चुभे है.
यहीं तो हमारे खिलने में सहायक बने है.

जन्म और कर्म भूमि दोनों की ही अलग है.
जीवन में दोनों के गुणों से महक ही महक है.

तेरे और मेरे खिलने, महकने के ज़ुदाअंदाज़ है.
दोनों ही अपनी बगिया के महकते गुलाब है.

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