दिखावा

रिश्तों से भरे इस मेले में
प्रियजनों के मंजुल रेले में
हर एक जान से प्यारा लागे
क्यूँ भूले,सब दिखावे का खेला रे?
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जीवन की टेढी-मेढ़ी राहों में
दुःख सुख की पगडंडियों में
जिन्हें प्रेम का हमराही माना था
वो सुख का ठिकाना बने रहे।

ऐसा कोई पैमाना भी नहीं
जो प्रेम को तौले सही सही
समय ही मात्र उपाय इसका
और कोई मूल्यांकन नहीं।
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राग अनुराग जो तन में भर जाए
श्रद्धा से मन भी झुक झुक जाए
वहां दिखावे का कोई स्थान नहीं
प्रेमी केवल ईश्वर सा हो जाए.।
अपर्णा शर्मा
Dec.22nd,23

तुम्हें पता है न

तुम्हें पता है न
मेरा तुमसे पहले उठ जाना
सब कुछ व्यवस्थित करना
हर वस्तु को सही स्थान देना
नहीं पता इसके पीछे छुपा प्रेम।
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तुम्हें पता है न
मेरा हर पल परेशान रहना
परेशानी में साथ खड़े रहना
और तुम पर आँच न आने देना
नहीं पता इसके पीछे छुपा प्रेम।

तुम्हें पता है न
मेरा हर खुशी को जश्न में बदलना
जश्न में जोश से हरपल भरे रहना
हरपल को नया आयाम देते रहना.
नहीं पता इसके पीछे छुपा प्रेम।
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तुम्हें पता है न
घर को चलाएमान रखने का अंदाज
जिंदगी में सुरों की सरगम की ताल
मैं और तुम का हम,जो बना हमराज
बस नहीं पता इसके पीछे छुपा प्रेम।
अपर्णा शर्मा
Dec.15th,23

दुःख और दर्द

दुःख आया,तो ज़माने ने कुछ यूं बाँट लिया
कि दर्द के साए, मेरे साथ जिए जा रहे हैं।

खूबियों को ज़माने पर,इस खूबी से लुटा दिया
पर दर्द को, बस कागज पर उकेरे जा रहे हैं।
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उदासियों को, दिन की खुशियों में छुपा दिया
और दर्द को रातों का सामान करते जा रहे हैं।

शोक में कभी डूबना और तैरना सीख लिया
ऐसे दर्द -ए-एहसास को, समंदर करते जा रहे हैं।
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ज़माने ने दर्द में जीना गज़ब का सिखा दिया
अब दर्द को ही जिंदगी समझते जा रहे हैं।

कोई मलाल के बगीचों को सींचता रह गया
वो दर्द को सीढ़ी बना जिंदगी जिए जा रहे हैं।
अपर्णा शर्मा
Dec.8th,23

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