अनचाहा अतिथि

कक्षा में गहन सन्नाटा छा गया
छात्रों का चेहरा सफेद हो गया
सुनकर इस अतिथि का नाम
घबराहट का माहौल हो गया।
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सारी शैतानियाँ रफ़ू चक्कर हो रही
पाठ्यक्रम पूर्ण हो, रणनीति बन रही
एक दूजे को सहयोग की भावना के साथ
छात्रों में अतिथि सत्कार की बैठकें हो रही।

अतिथि आगमन की तिथि निर्धारित है
एक माह तक विश्राम का एलान है
प्रत्येक तिथि पर भिन्न भिन्न है कार्यक्रम
सभी को सफल बनाने की योजना है।
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हँसी, ठिठोली से दिन थे गुजार रहे
विद्यालय में जिंदगी को खूब जी रहे
परीक्षा नाम के इस खूंखार अतिथि से
मस्तमौला छात्र भी अब संजीदा हो रहे।
अपर्णा शर्मा
Jan.12th,24

लकीरें

मैं बहता नीर
कहते फकीर
एक दम फक्कड़
जानू न लकीर।

रोंद दिए रास्ते
तोड़े झूठे वास्ते
नए मार्ग पर
चले हँसते हँसाते
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लकीर पड़ी रही
ठोकरे खा रही
क्षीर सी जिंदगी
लुत्फ उठा रही।

जो लकीर से बंधे
हाल फकीर से कसे
अक्ल पर पत्थर डाल
वहीं पत्थर घिस रहे।
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उठो! अपने को पहचानो
अपनी शक्ति को आजमालो
अंतरंगी सी इन लकीरों में
सुनहरी तकदीर सजालो।
अपर्णा शर्मा
Jan.5th,24

गलत

हर गलत को जब जब सही किया
तब तब नया व्यक्तित्व गढ़ता गया.

हर गलती समझदार बनाती रही
यूँ मासूमियत से दूर होता गया.

हर गलत पर इंसान बनता रहा
और अपने से,बहुत दूर होता गया.

कुछ बहुत सही सा था मेरे लिए
वो गलत सा सबको चुभता गया.

जब गलत को गलत कहा जोर देकर तब वजूद सच का खो सा गया.

अपर्णा शर्मा
Dec.29th,23

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