दो पंक्ति

किसी को प्यार, मोहब्बत, इश्क, प्रेम हुआ तो क्यूं जाने।
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मिलन,विरह,से परे आसक्ति तक प्रेम हुआ तो माने।
अपर्णा शर्मा
June16th,2026

ठहराव भी वाजिब है

सफर है यह जिंदगी,जहाँ है हज़ारों उलझने
जब भी मौका मिले सफर में ठहराव भी वाजिब है।

अगर कोई हद से ज्यादा दिखाए अपनापन
तो सफर में कुछ हादसा होना लाज़िम है।
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जरूरी नहीं इस सफर में सामान पर डाका पड़े
एहसासों का खजाना लुटना भी शामिल है।

नरम दिल ऐसे ही हर पड़ाव में न लुटते रहे
ठहर कर सोचो,क्या दुनिया एहसासों के काबिल है ?
अपर्णा शर्मा
June 12th,2026

दो पंक्ति

इंतजार की घड़ी से जार जार होकर
आँखे थक गई कब से बेजार होकर
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खुद_ब-खुद जब ख्वाबों से हुई गुफ़्तगू 
पलकें झुक गई ख्वाब को सच समझ कर।
अपर्णा शर्मा
June 10th,2026

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