कोशिश

अनंत तक, कोशिशें जारी रहे, कि द्वेष भाव, स्नेह बन जाए।

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अंत तक, कोई कोशिश न हो, कि प्रीत भाव, बैर बन जाए।।

हर्फ

जिल्द किताबों की, बदलने से क्या फायदा

बदलता नहीं कभी, किसी हर्फ़ का मायना।

ओस



ना जाने कौन, रात भर आँसू बहाता रहा।
चांदनी रात में, किसे याद कर, जागता रहा।

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छिप गया, सूरज की पहली किरण के साथ ही।
भिगो गया, सम्पूर्ण धरा को सुना के कथा प्रीत की।

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