दालान से बड़ी खुशगवार लगती ये बारिश,
प्रिय की याद सी बरसती, मुस्कुराए बारिश.
बेमौसम गर खलिहान में बरस जाती ये बारिश,
माथे की शिकन, चिंता, दुश्वारी बढ़ाए बारिश.
दालान से बड़ी खुशगवार लगती ये बारिश,
प्रिय की याद सी बरसती, मुस्कुराए बारिश.
बेमौसम गर खलिहान में बरस जाती ये बारिश,
माथे की शिकन, चिंता, दुश्वारी बढ़ाए बारिश.
समय कहता मानव से सब तेरे कर्मों का है फल.
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शुभ,अशुभ कहता तू मुझे हर क्षण हर प्रतिपल.
वो नफरत से लबालब बगावत को निकले हैं
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हम भी इश्क में डूब कर इबादत को निकले हैं ।