खुदा ने जाम सी बख्शी है जिंदगी
कुछ छलक गई,कुछ गटक गई।
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बेफिक्र सी लगी, जब जब जिंदगी
कभी फिसल गई,कभी अटक गई।
अपर्णा शर्मा
August 22nd,23
गुफ़्तगू
बिन मुलाकात होती रही मुसलसल गुफ़्तगू
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गज़ब खामोशी पसरी जब हुए वो रुबरु।
अपर्णा शर्मा
August8th, 23
जीस्त
मजबूरियाँ किनारे पर ठहर गई
एहसास ए सुकून जब मिला।
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जश्न ए बहार सी जीस्त मिल गई
वफा ए समंदर आ मिला।
(जीस्त- जिंदगी)
अपर्णा शर्मा
August 1st, 23
