जीवन के सफर में आते कई पड़ाव
कभी आशा भरी होती सुर्ख उजास।
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ऊँचाईयां छूता मध्याह्न जीवन का
फिर शीतलता दे जाती जीवन में साँझ।
अपर्णा शर्मा
Oct.10th,23
जीवन के सफर में आते कई पड़ाव
कभी आशा भरी होती सुर्ख उजास।
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ऊँचाईयां छूता मध्याह्न जीवन का
फिर शीतलता दे जाती जीवन में साँझ।
अपर्णा शर्मा
Oct.10th,23
जिंदगी के सीधे से रास्तो पर ,
अकस्मात आ ही जाते हैं, जब तब तीव्र मोड़
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कोणों से काटते, जटिल रास्ते भी,
कभी बदल न पाए, आशा भरा दृष्टिकोण।
अपर्णा शर्मा
Sept.12th,23
बेदर्द को हमदर्द समझने की भूल कुछ यूँ हो गई
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कि फिर हमसफर की तलाश यूँ मुकम्मल हो गई।
अपर्णा शर्मा
August 29th,23