गर कोई दीवार सा हो जाए, जो सभी को समझे ,ज़माना उसे सुना जाए
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वो सुने सभी की,ना कुछ कहे, नया चरित्र भी उसी का गढ़ जाए.
अपर्णा शर्मा june11th,24
‘मैं’
जब जब ‘मैं’जीता है,तब तब ‘हम’ हार गया
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रंग बदलती दुनिया में,रिश्ता यूँ बेहाल हुआ।
अपर्णा शर्मा
May28th,24
संस्कार
पहली पीढ़ी से ले कर अमूल्य संस्कार
दूजी ने तीजी पीढ़ी को दिए अशुद्ध आचरण
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जो सच्चे संवाहक न बने संस्कारों के
वृद्धावस्था में दिखेगा अंधकार ही अंधकार.
अपर्णा शर्मा
May14th,24
