बाट

गाँव के दरवाजों पर ,सुर्ख सी आँखे बाट जोहती https://ae-pal.com/

इन में आज भी कहीं ,आस के झिलमिलाते मोती
अपर्णा शर्मा

June 20th, 23

आस

हर रिश्ते का स्थाई भाव टिका है किसी न किसी आस तक

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वहीं स्नेह में इंतज़ार ही टिका हैअस्थायी भाव संग,अंत तक।
अपर्णा शर्मा
June 13th, 23

ख़्वाहिश

ख़्वाहिश है कभी अंगड़ाई,कभी परछाई,कभी
मुस्कराती।
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कभी पूरी,कभी अधूरी,कभी जिम्मेदारियों में कुनमुनाती।
अपर्णा शर्मा
6th June 23

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