स्व ज्ञान को सर्वोपरि समझ कर
अपने को ही सर्व ज्ञानी जान कर
कूपमंडूक सा अपने को सर्वोच्च जान
सीमित दायरे को अपनी दुनिया जान कर।
https://ae-pal.com/
अकेले अपनी जिंदगी गुज़ारे जा रहा
खुद की खड़ी दीवारों में खुद कैद कर रहा
इन ऊँची दीवारों को अपनी सफलता जान
खुद को खुदा सा समझता जा रहा।
दुनिया से बेख़बर अपने जाल में फंसा
उन्नति, उत्थान से हो कर बेपरवाह
सोचता मेरे उत्थान से ईर्ष्यालु है सब
मुझसे अब कोई आँख न मिला रहा।
https://ae-pal.com/
कोई उसको निकाले तो कैसे निकाले?
जब तक वो खुद कूप से निकलना न चाहे
सब साधन लिए, हितैषी कोशिश में जुटे हुए
निकास की तीव्र इच्छा की प्रतीक्षा लिए।
अपर्णा शर्मा
Feb.23rd,24
गुमाँ होता गया
जब चला था वो सफर को
काफिला संग था साथ को
चलता रहा आगे बढ़ता रहा
नाज़ से देखता वो सभी को।
https://ae-pal.com/
सभी मंजिल के इस सफर में
चल पड़े ऊँची नीची डगर में
रुक गए, कुछ मुकाम पा गए
अब भी थे सभी, संग साथ में।
वो सबसे अलग दिखने लगा
बैठक में विलग सा रहने लगा
ठहाके गूँजते जब फ़िजा में
वो बुत बना चुप रहने लगा।
https://ae-pal.com/
हौले-हौले उसे गुमाँ होता गया
वो अहं की हुकूमत में समा गया
मैं से भरे इस मुकाबले के खेल में
अहंकार उस का हमसफर बन गया।
अपर्णा शर्मा
Feb.16th,24
अनुशासन
नक्षत्रों का निरंतर पारगमन
और दिवस का नित आगमन।
सभी एक चक्र से बंध कर
करते अनुशासन का मार्गदर्शन।
समय पर चल कर
समय पर काम कर।
समय के इस ध्यान को
अनुशासन का मान कर।
https://ae-pal.com/
समय ग़र टालते जा रहे
आराम यूँ ही फरमाते रहे।
काम को यदि हो घसीटते
कराहता अनुशासन रहे।
अपना खूब ख़्याल कर
किसी को बेहाल न कर।
समय सभी का क़ीमती
अनुशासन का ख़्याल कर।
https://ae-pal.com/
न तू अवरोध उत्पन्न कर
न अवरोध को सही कर।
अवरोध ही अनुशासनहीनता
स्वसंचालित हो और अनुशासन धर।
अपर्णा शर्मा
Feb.9th,24
