कशमकश

अजीब सी कशमकश में जी रहे हैं वो
हर नज़र को नज़रअंदाज कर रहे हैं वो।
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जो कभी देखते ही,एक दूसरे को गले लगते थे
मन से कोमल पर,बाहर से सख्त हो रहे हैं वो।

अपर्णा शर्मा jan.20th,2026

वीरानगी

परेशानियों के आते ही
खुशियाँ मेहमान बन गई।
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जैसे पतझड़ के आते ही
बाग में वीरानगी छा गई।
अपर्णा शर्मा
Jan.6th,26

हिसाब

जिंदगी खर्च करके,उसके हाथ बस उमर रह गई
क्या खोया,क्या पाया, दिल में यहीं कसक रह गई।
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किश्तों सा खर्च करा था,जिंदगी के हर लम्हे को 
उमर का पुलिंदा थमाकर,जिंदगी हिसाब कर गई।
अपर्णा शर्मा
Dec.30th,25

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