जिंदगी खर्च करके,उसके हाथ बस उमर रह गई
क्या खोया,क्या पाया, दिल में यहीं कसक रह गई।
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किश्तों सा खर्च करा था,जिंदगी के हर लम्हे को
उमर का पुलिंदा थमाकर,जिंदगी हिसाब कर गई।
अपर्णा शर्मा
Dec.30th,25
होशियारी
जब तलक, रखे था वो,अपना सादा मिजाज
छला जाता रहा,वो, हर वक़्त, हर एहसास।
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सीख लेता गर वो,ज़माने की जरा भी होशियारी
जिंदगी में आ जाता उसके सुकून भरा इत्मिनान।
अपर्णा शर्मा
Dec.23rd,25
साँझ का उत्सव
उठो, चलो, थोड़ा खुद के लिए भी जी जाओ
बाहर निकलो, थोड़ा रुबरु दुनिया से हो जाओ।
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जिम्मेदारी निभाते,निभाते, जीवन की साँझ आई
आओ,अब इस साँझ का उत्सव तुम मनाओ ।
अपर्णा शर्मा
Dec.9th,25
