सच है कि इश्क फुर्सत का मेला है,जिसमें मशरूफियता का अपना ही रेला है।
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गर इश्क में,न हो किसी एक को भी फुर्सत,तो संजीदा इश्क भी इस जहाँ में अकेला हैं.
अपर्णा शर्मा
July1st,25
कब बरसेंगे?
घन-घनाते घिर आए बदरा
तपती धरा को भाए बदरा
तरसे धरती, तरसे प्रकृति
कब बरसेंगे ? काले बदरा।
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टीटहरी की अब एक ही टेर
मोर को नाचने में हो रही देर
दादूर बाहर आने को व्याकुल
कब बरसेंगे ? काले बदरा।
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सूखी अंखियन,पी की प्यासी
खेती सूखी, बिन पानी सारी
गांव,शहर सब बिन पानी सूखे
कब बरसेंगे ? काले बदरा।
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जागी, पुरवाई से आस बड़ी
बीती गई अब आधी आषाढ़ी
धरे ओसारे , उपले,लक्कड़
कब बरसेंगे ? काले बदरा।
कब बरसेंगे ? आस के बदरा।
अपर्णा शर्मा
June27th,25
तरजीह
नजरअंदाज करके वो वालदैन को
बेवजह तरजीह दे रहे हैं औलाद को।
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समझ बैठे हैं,महफ़ूज़ अपना मुस्तकबिल
जानते नहीं वक़्त क्या देगा नसीब को।
अपर्णा शर्मा
June 24th,25
