जिंदगी में सादगी भी नाटक सी जी रही
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वक़्त देख कर ओढ़ी और उतारी जा रही.
जिंदगी में सादगी भी नाटक सी जी रही
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वक़्त देख कर ओढ़ी और उतारी जा रही.
कोई दिल को भा गया
रोम-रोम में समा गया ।
नज़रे बोलती रही
लबों पर मौन छा गया ।
ख़त जब उसे लिखा
बस नाम ही था लिखा ।
भावनायें बोल रही
शब्द मौन हो गया ।
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आचरण सब बदल गया
व्यवहार कुशल हो गया ।
सब हैरां से देख रहे
चापल्य मौन हो गया ।
समय ठहर सा गया
ख़्याल ने ख़्याल जिया ।
चित्त हर्षित हो रहा
इश्क मुखर हो गया । अपर्णा शर्मा
जिंदगी के हर खुशनुमा पल में, जब देखा आईना
ग़मों की टीस,दर्द की चीस से होता रहा सामना ।
ग़म के सागर में,डूबते तैरते,गुजर गई ना जाने कितनी रातें
खुशी के पैमाने छलके,तो भी नींद के इंतजार में थी रातें ।
उसकी आँखें ही,मेरे हर अक़्स का हमेशा रही आईना
हर खुशी, ग़म का करती रही जो ताउम्र मुआयना ।