जीवन के संघर्ष भरे चक्रव्यूह में
वीर अभिमन्यु से लड़ जाए।
प्रवीण हो कर, पराक्रम रूप में
योद्धाओं से फिर भिड़ जाए।
https://ae-pal.com/
जब निरंतर व्यूह के संघर्षों में
शिकंजा मजबूती से कस जाए।
स्वरचित कृत्रिम इस संसार में
कोई ओर-छोर नज़र न आए।
https://ae-pal.com/
तब एक संवाद स्वयं का स्वयं से
कर लेना आवश्यक हो जाए।
अपनी शक्ति,अपनी दुर्बलता से
अपना साक्षात्कार हो जाए।
फिर सहसा,सर्व शक्ति एकत्र हो
वीर अर्जुन सा भान करा जाए।
सभी चक्रों को भेद, विजयी हो
शायद अभिमन्यु बाहर निकल आए।
ये लड़कियां
हंसती, मुस्कराती ,चहकती है
हर अंदाज में शोर रखती है ।
https://ae-pal.com/
खुशनुमा माहौल बना कर दोस्तों
अनकहा शोर दबाए फिरती है ।
कंटक
हर कली पुष्पित हो झूम रही
उपवन को सुरभित कर रही
प्रफुल्लित मन में जगती तृष्णा
पुष्प पाने की आस जगा रही।
विपुल अभिलाषा सदा रखे
पुष्प जो शूल कंटको से घिरे
मन प्राण में लालसा को जगाए
अंगीकार को मन उपवन तरसे।
हर कली पुष्प के समीप ही
पत्तियों के साथ साथ शूल भी
कुसुम को रक्षित कर रहे
एषा बनी आकाश कुसुम सी।
कंटक नहीं ये कवच से डटे
पुष्प की रक्षा को अडिग खड़े
कोई भी प्रहार करे पुष्प पर
लहू-लुहान कर उसे जा चुभे।
