जिंदगी के कैनवास पर
अनगिनत रंग बिखरते रहे
वक़्त के साथ-साथ कभी
निखरते रहे कभी बिखरते रहे।
जिंदगी में हर शख्स कुछ
सीखा कर चला गया
इसीबीच दोस्तों का भी दौर
गुबार बन कर उड़ गया।
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प्यार के वो अनमोल पल
सुनहरा रंग भर गए
जिंदगी के कैनवास पर
सुकून का रंग दे गए।
कभी थी स्याह सी जिंदगी
उड़ेली तब उम्मीद की रोशनाई
ऐसे ही रंगों के संग खेलते
हमने पूरी जिंदगी थी बिताई।
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अकेलापन का ये धूसर रंग
मानो जिदंगी करे बदरंगी
भिगोकर यादों की बारिश में
लगे यही सावन की बदली।
जिंदगी के अंत में आज भी
कैनवास अधूरा सा दिखा
अनगिनत रंग होते हुए भी
विश्वास का रंग न दिखा।
अपर्णा शर्मा
August 7th,2026
