मजबूरियाँ किनारे पर ठहर गई
एहसास ए सुकून जब मिला।
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जश्न ए बहार सी जीस्त मिल गई
वफा ए समंदर आ मिला।
(जीस्त- जिंदगी)
अपर्णा शर्मा
August 1st, 23
उड़ान
हर जीव अपनी मुट्ठी में लाता अपनी धरती अपना आसमान।
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हौसलों की ऊर्जा हो बेशक,क्यूँ ना मिलती सपनों की उड़ान ?
अपर्णा शर्मा
July 25th, 23
मानव
अद्भुत तत्वों का मिश्रण मानव देह कहलाया,जिसमें अवनी,अग्नि,अंबर समीर और नीर समाया।
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आलौकिकता से भरा संसार लौकिकता लोलुप हुआ,इस सबमें भरमाया मानव पत्थर की मूर्त हुआ।
अपर्णा शर्मा
July 18th,23
