जिंदगी

खुदा ने जाम सी बख्शी है जिंदगी
कुछ छलक गई,कुछ गटक गई।
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बेफिक्र सी लगी, जब जब जिंदगी
कभी फिसल गई,कभी अटक गई।
अपर्णा शर्मा
August 22nd,23

स्वाधीनता

देश मेरा एक माला जैसा,जिसका हर मनका है प्यारा
याद रहे ,कोई ग़र कहीं छूट गया तो पीछे होगा देश हमारा ।
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प्रति वर्ष स्वाधीनता दिवस हमको यहीं बतलाता है
केवल अपने अधीन रहो, किसी के बहकावे में न आना है।
अपर्णा शर्मा
August 15th, 23

गुफ़्तगू

बिन मुलाकात होती रही मुसलसल गुफ़्तगू
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गज़ब खामोशी पसरी जब हुए वो रुबरु।

अपर्णा शर्मा

August8th, 23

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