आस

काश में जो छिपी रहती है थोड़ी सी आस
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वहीं बार बार जगाती है जीवन में विश्वास।
अपर्णा शर्मा
Nov.18th,25

खुमार

जिन लोगों पर नाज़ था कभी
नशे से चढ़े थे रिश्ते जो कभी।
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गुबार था या वहम था मन का
नशा न रहा पर खुमार था अभी।
अपर्णा शर्मा
Nov. 11th,25

संतुष्टि

जैसे कहे जिंदगी वैसे ही जिए जा रहे हैं सभी
वैसी नहीं है जिंदगी तो ऐसे ही जिए जा रहे सभी।
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क्यारियों में पौधे उगा कर,जो आनंद ले रहे थे कभी
वहीं गमलों में, प्रकृति को समेट कर,संतुष्ट हैं अभी।
अपर्णा शर्मा
Nov. 4th,2025

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